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“मूषक” अपनाये, देशभक्ति की भैलिडीटी बढ़ाये ।

Posted On: 17 Feb, 2016 Technology में

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स्वदेशी और देशभक्ति की बात तो हर कोई कहता है, लेकिन जब लागू करने की बारी आती है तो कोसों दूर हट जाते हैं । दोस्तों, हम 10 सितम्बर, 2015 को भारत के एक हिन्दी पुत्र द्वारा 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में मूषक सोशल नेटवर्किंग साईट को लोगों के बीच लाया गया है । यह साइट आज के डिजिटल युग में बदलती तकनीक के साथ हिन्दी को लोगों से परिचित कराती है ताकि लोग रोमन लिपि से पिछड़कर अपनी पहचान न खो दे । इसे कम्प्यूटर पर गूगल सर्च में www.mooshak.in के नाम से खोजा जा सकता है तथा स्मार्टफोन में इसके एप्प को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है ।

अगर हम इसके विशेषताओं की बात करते है तो ट्विटर पर जहाँ अधिक से अधिक 140 अक्षरों को टाइप करने की सुविधा थी वही मूषक पर अपने संदेश को 500 अक्षरों तक टाइप की सुविधा दी गई है । मूषक पर आप हिन्दी में भी टाइप कर सकते हैं और अगर रोमन में टाइप करते हैं तो मूषक खुद उसे देवनागरी लिपि में बदल देगा । आगे चलकर देश की सभी भाषाओं में मूषक को संचालित किया जायेगा । भाषा वैज्ञानिकों का विचार है कि जो भाषा हम बोलना जानते हैं उसे थोड़े प्रयत्नों से ही सरलता से लिखना सीख सकते हैं ।

ट्विटर पर एक व्यक्ति कई-कई फर्जी खाते खोल लेता है, लेकिन मूषक पर अकाउंट मोबाईल नम्बर के जरिये खुलेगा ताकि एक व्यक्ति की पहचान एक ही रहे । मूषक में दोस्तों, रिश्तेदारों, अभिनेताओं, राजनेताओं आदि को अलग-अलग सूची में रखा जा सकता है, जिससे ढेर सारी सम्पर्कों के बीच किसी को खोजने में परेशानी न होगी ।
देशभक्ति का ताजा उदाहरण है चीन की माइक्रोब्लॉगिग साइट वेइबो । जिसने वहाँ के बाजार में ट्विटर के पसीने छुड़ा रखे है । अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक वेइबों के यूजरों का आंकड़ा 45 करोड़ से भी ज्यादा है वही वर्ष 2006 मे शुरु हुए ट्विटर पर फिलहाल 30 करोड़ से भी ज्यादा यूजर है । भारत की जनसंख्या इतनी है कि विश्व के किसी भी सोशल साइट को अर्श से ले जाकर फर्ज तक पहुँचा सकता है । यहाँ तक कि अमेरिका के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में भारतवासियों की संख्या ज्यादा है । इतना ही नहीं फेसबुक, गुगल, ट्विटर जैसे सोशल साइटों के कार्यालयों में भारतवासी अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य की बात की स्वदेश निर्मित इस प्रकार की सोशल साइट आज तक नहीं बन पाया था ।

इस प्रकार, अगर सभी भारतवासी भारत निर्मित इस सोशल साइट का उपयोग करेंगे तो चीन की भांति हम भी ट्विटर को टक्कर दे सकते हैं तो देर किस बात की देशभक्ति बढ़ानी है तो कम से कम एक बार प्रयोग करके देख सकते हैं ।

“मूषक अपनाये, देशभक्ति की भैलिडीटी बढ़ाये।“

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

माला कुमारी के द्वारा
February 17, 2016

शानदार कोशिश है…

माला कुमारी के द्वारा
February 17, 2016

शानदार कोशिश है मूषक सोशल साईट का आना…


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